उस छिद्र से ब्रह्माण्ड के बाहर को निकली थी फिर जल की धारा। उस छिद्र से ब्रह्माण्ड के बाहर को निकली थी फिर जल की धारा।
कहानी जो आज भी जीवंत है कहानी जो आज भी जीवंत है
विभूतिओं का संक्षिप्त वर्णन है विस्तार करो इसका जन जन में। विभूतिओं का संक्षिप्त वर्णन है विस्तार करो इसका जन जन में।
कुछ मुकम्मल ख्वाब, पर अधूरे होने पर नाज़ भी हैं, उस पुरानी डायरी की धूल की कसम, आहटें आज भी हैं। कुछ मुकम्मल ख्वाब, पर अधूरे होने पर नाज़ भी हैं, उस पुरानी डायरी की धूल की कसम, ...
छिड़ी एक जंग जो राजा संभाल ना पाया... अपनी प्यारी मोहब्बत को बचा ना पाया... छिड़ी एक जंग जो राजा संभाल ना पाया... अपनी प्यारी मोहब्बत को बचा ना पाया...
"ख़ामोशी एक ज़ुबा" जो समझ सकता कोई,तो शायद ये दिल ना, रोता अकेले बैठ यूँ ही। "ख़ामोशी एक ज़ुबा" जो समझ सकता कोई,तो शायद ये दिल ना, रोता अकेले बैठ यूँ ही।